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एडवोकेट जतिंदर अरोड़ा ने भारतीय सेना के बिग्रेडियर को दिलाया इंसाफ, बिल्डर ने लगाया था चूना, कंज्यूमर कोर्ट ने फटकारा

बिल्डर कंपनी को सेवा में कोताही का दोषी ठहराते हुए ग्राहक को 30-30 हजार रुपए बतौर मुआवजा व 10-10 हजार रुपए बतौर कानूनी खर्च की अदा करने का दिया आदेश

बिग्रेडियर ने एडवोकेट जतिंदर अरोड़ा की तारीफ़ व धन्यवाद करते हुए कहा कि माननीय अदालत में उनकी दलीलों से उन्हें इंसाफ मिल पाया

जालंधर, एच एस चावला। अपनी पूरी जिंदगी देश सेवा के नाम करने वाले भारतीय सेना के बिग्रेडियर रणदीप सिंह चट्ठा को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस फ्लैटों का सब्जबाग दिखाकर चूना लगाने वाले बिल्डर के खिलाफ यहां की कंज्यूमर कोर्ट (जिला उपभोक्ता फोरम) ने कड़ा रूख अपनाया है। कोर्ट ने नैशनल हाइवे-1 स्थित सूर्या एनक्लेव के निकट बने शोर्य टावर्स प्राइवेट लिमिटेड फ्लैट निर्माता कंपनी को फटकार लगाते हुए फ्लैट की रकम 9 प्रतिशत की सालाना ब्याज दर के साथ लौटाने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने उक्त बिल्डर कंपनी को सेवा में कोताही का दोषी ठहराते हुए यह आदेश भी दिया है कि वो ग्राहक को 30-30 हजार रुपए (कुल 60 हजार रुपए) बतौर मुआवजा अदा करे। साथ ही 10-10 हजार रुपए बतौर कानूनी खर्च की अदायगी भी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने माना कि बिल्डर ने ग्राहक सेवा शर्तों का उल्लंघन किया है, जिसके लिए उसको दोषी ठहराकर ग्राहक को वाजिब मुआवजा दिया जाना जरूरी है।

इस बारे में जानकारी देते हुए बिग्रेडियर रणदीप सिंह चट्ठा के वकील जतिंदर अरोड़ा ने बताया कि दोषी करार कंपनी के खिलाफ भारतीय सेना के बिग्रेडियर अर्बन एस्टेट जालंधर निवासी बिग्रेडियर रणदीप सिंह चट्ठा ने साल 2023 में दो केस दायर किए थे। बिग्रेडियर चट्ठा जिन्होंने पूरी जिंदगी देश सेवा के नाम कर दी और उसके बदले सरकार से जो आर्थिक लाभ मिले उससे दो फ्लैट बुक करवाए लेकिन बिल्डर कंपनी ने उनकी देश सेवा की कोई कद्र करके उनको छूट देना तो दूर उसने जो दो फ्लैट के बदले पूरे पैसे लिए, वो भी हड़प लिए थे।

एडवोकेट जतिंदर अरोड़ा ने बताया कि उनके क्लाइंट बिग्रेडियर चट्ठा ने 05.04.2006 को एग्रीमेंट के जरिए दो फ्लैट बुक करवाए थे। करीब दो लाख रुपए की बुकिंग राशि अदा करने के बाद बाकी रकम करीब 20 लाख रुपए किश्तों में अदा कर दी गई। दोनों फ्लैटों का कब्जा साल 2007 में देना था लेकिन बिल्डर के अधिकारी कई साल बहाने बनाकर टालते रहे और कंपनी अधिकारी उनको सरकार की खामियां ही गिनवाते रहे और कब्जा नहीं दिया।

एडवोकेट जतिंदर अरोड़ा ने बताया कि करीब 10 साल बाद वे नोयडा स्थित बिल्डर के आफिस गए और शोर मचाया तो बिल्डर ने ईमेल भेजकर वैक्लपिक प्लाट ऑफर किया लेकिन अप्रोच रोड न होने के कारण उस ऑफर को ठुकरा दिया गया। फिर कोरोना आ गया। अतः साल 2023 में श्री चट्ठा ने मुझसे संपर्क करके उक्त बिल्डर कंपनी के खिलाफ केस लडने का अधिकार सौंपा। एडवोकेट जतिंदर अरोड़ा ने कहा कि जल्द ही फैसला लागू करवाने के लिए याचिका दायर की जाएगी।

वहीं बिग्रेडियर रणदीप सिंह चट्ठा ने अपने वकील जतिंदर अरोड़ा की तारीफ़ व धन्यवाद करते हुए कहा कि माननीय अदालत में उनकी दलीलों से उन्हें इंसाफ मिल पाया है, जिसके लिए मैं तहदिल से उनका शुक्रिया अदा करता हूँ।

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