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क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर महाराज ने सभी को समझाया “जीवन सफल बनाने का मार्ग”

जालंधर कैंट, सैवी चावला/रमन जिंदल। जालंधर कैंट में स्थित बड़ी धर्मशाला में चल रहे “भव्य मंगल प्रवेश एवं विराट धर्म सभा” में क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि मकान बनाया जाता है, घर बसाया जाता है, मकान पैसे से बनता है, घर प्रेम से बनता है। जिस घर में चार भाई रहते हों और आपस में बात ना करते हों, वह मकान है मगर जिस घर में सभी एक-दूसरे से प्रेम भरी वार्ता करते हों एक साथ बैठकर भोजन करते हों, सभी सुख-दुख में साथ रहते हों, वह घर है।

क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने संबोधित करते हुए आगे कहा कि भाई से कभी भाई को बैर नहीं करना चाहिए। भाई कैसा भी हो उसका साथ देना चाहिए। मंदिर में 10 लाख रुपए का दान करने के पहले भाई अगर परेशान है तो उसकी परेशानी को दूर करने के लिए उसे 10 लाख रुपए पहले देना चाहिए।

भारत की परंपरा में श्री राम को 14 वर्ष का वनवास मिला तो लक्ष्मण भाई की सेवा के लिए जंगल में चल पड़े और भरत ने राजगद्दी पर अपने भाई की चरण पादुकाएं रखकर 14 बरस तक शासन किया।
यह भारत की परंपरा है। रावण के कुल में विभीषण ने परिवार द्रोह किया, तो आज भी संसार में सब नाम रखे जाते हैं मगर कोई भी अपने बेटे का नाम विभीषण नहीं रखता।

बचपन में कई बार भाई आपस में लड़े हैं और फिर एक साथ बैठकर के एक ही आइसक्रीम को दोनों भाइयों ने मिलकर के कई बार खाया है। बड़ा होने के बाद बोलचाल होते ही एक-दूसरे से जो बात करने की आदत खत्म कर देते हैं यह ठीक नहीं है। मुनि श्री ने आगे कहा कि हमारी संस्कृति एक बार किसी पुरुष को कोई नारी पति के रूप में मन से स्वीकार कर लेती है, उसके बाद पर पुरुष के बारे में स्वप्न में भी विचार नहीं करती है।

परंपरा के 22 वें तीर्थंकर नेमिनाथ विवाह करने के लिए जाते हैं। राजुल से पशुओं को बना हुआ देखकर उन्हें वैराग्य पैदा हो जाता है और वह संन्यास धारण कर लेते हैं। राजुल जिनके साथ उनका विवाह होना था पिता के समझाने के बाद भी राजुल ने कहा मैंने नेमिनाथ को मन से पति मान लिया है, इसलिए उनके पदचिन्ह पर चलना मेरा धर्म है और वह भी संन्यास को ग्रहण कर लेती है। विवाह के पश्चात पर पुरुष या पर नारी से संबंध बनाना भारतीय संस्कृति का मजाक बनाना है। भारतीय संस्कृति को मजाक बनाने वाले को भारत में रहने का कोई हक नहीं। भारत रामकृष्ण, बुद्ध, महावीर की तप स्थली है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में पूज्य मुनि श्री के गुरु गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज का अतिथियों द्वारा चित्र अनावरण किया गया। तत्पश्चात मुनि श्री के पाद प्रक्षालन करने का नीरज कुमार जैन परिवार ने सौभाग्य प्राप्त किया।

संध्या कालीन समय में आनंद यात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें मुनि श्री ने कहा हंसना पुण्य है।
हंसता हुआ व्यक्ति पाप नहीं कर सकता, इसलिए जिंदगी में मन को हल्का करने के लिए दो ही रास्ते हैं या तो हंसकर के मन को हल्का कर लें या रो करके।

कार्यक्रम के अंत में मुनि श्री की आरती की गई। मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज का सोमवार को प्रातः 8:30 बजे से 9:30 बजे तक विराट धर्म सभा का आयोजन बड़ी धर्मशाला छावनी में किया जाएगा। संध्याकालीन 7 बजे सत्संग का द्वितीय सत्र आयोजित होगा।

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