
जालंधर कैट, सैवी चावला/रमन जिंदल। कैंट के मोहल्ला नंबर 3 में स्थित बड़ी धर्मशाला में दिगम्बर जैन समाज की ओर से चल रहे विराट धर्म सभा में क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने अपने मुखारबिंद से मंगल प्रवचन करते हुए कहा कि यह मनुष्य जीवन अमूल्य है और यह 84 लाख योनियों में भटकने के उपरांत बहुत पुण्य से हमें यह प्राप्त हुआ है।
मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने कहा कि हम सारा जीवन आपा धापी और धन के उपार्जन में नष्ट कर देते हैं और अंतिम समय हमें ये एहसास होता है कि हम उस नाव पर सवार थे, जिसपे हमने चप्पू तो बहुत चलाया परन्तु नाव की रस्सी नहीं खोली अर्थात जहां से चले थे वहीं खडे हैं।
मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने कहा कि अगर हमें नेत्र मिले हैं तो उससे प्रभु के दर्शन कर लें, अगर पांव मिले हैं तो उससे मंदिर तक चले जाएं और अगर जिव्हा मिली है तो प्रभु भजन कर लें। उन्होंने कहा कि अपना जीवन ऐसे जियो, जिससे मृत्यु के उपरांत किसी और को आपकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना न करनी पड़े। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तजनों ने मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने को श्री फल अर्पण किया।
















