ਦੁਨੀਆਂਦੇਸ਼ਪੰਜਾਬ

कैंटोनमेंट बोर्ड जालंधर की विशेष मीटिंग में सिविल सदस्य पुनीत भारती शुक्ला ने पब्लिक के हक में की आवाज़ बुलंद

बिल्डिंग बाईलॉज में नए-नए प्रावधान लागू करने के विरोध में दिया डाइसैंट नोट, रात को बंद होने वाले नाकों का भी उठाया मुद्दा

जालंधर कैंट, एच एस चावला/सैवी चावला। कैंटोनमेंट बोर्ड जालंधर की विशेष मीटिंग सब एरिया कमांडर अतुल सूद की अध्यक्षता में हुई, जिसमें सीईओ कुंवर ओमपाल सिंह व सिविल सदस्य पुनीत शुक्ला उपस्थित रहे। बैठक की शुरुआत में सिविल सदस्य पुनीत शुक्ला ने अपना कार्यकाल बढ़ने पर शपथ ली, उपरांत प्रस्ताव संख्या 2 में बिल्डिंग बाईलॉज 2026 पर श्री शुक्ला ने असहमति जताते हुए उसको कारणों के साथ बोर्ड की कार्यवाही में सम्मिलित करने लिए कहा।

पुनीत भारती शुक्ला ने कैंटोनमैंट एक्ट की धारा 235 के विरोधाभास में भवन निर्माण पुनर्निर्माण के लिए केवल रिकॉर्ड में मालिक को प्रार्थना पत्र देने की योग्यता को गैर कानूनी बताया। पिछली बोर्ड मीटिंग दिनांक 2 जनवरी के प्रस्ताव पर भी असहमति दर्ज करवाते हुए श्री शुक्ला ने नगर निगम और दक्षिण भारत की छावनियों से कम ऊंचाई का विरोध किया और आस-पास के सैनिक रिहायशी निवास से कम ऊंचाई को सिविल जनसंख्या के साथ भेद पूर्ण कहा।

शुक्ला ने कहा कि प्रस्तावित बिल्डिंग बाईलॉज भारत सरकार के नीति आयोग की ऊंचाई और विस्तार के लिए शहरी क्षेत्र में नीति के विपरीत बताया और इन को भारत सरकार के आवासीय और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा मॉडल बिल्डिंग बाईलॉज 2016 के विरोधाभास में बताया।

शुक्ला ने बताया कि दिल्ली कैंटोनमैंट बोर्ड द्वारा मॉडल बिल्डिंग बाईलॉज 2016 को देश की सभी छावनियों द्वारा 2017 में पारित करने और लागू न करने बारे लिखा है जो रक्षा मंत्रालय ने सिविल नागरिकों के हित में लागू नहीं किया व उनकी स्वीकृति के लिए भी लिखा है। उन्होंने बंगलो एरिया के निर्माण के लिए कम ऊंचाई और कम स्पेस पर भी आपत्ति की है।

शुक्ला ने पब्लिक से आपत्ति लेने के लिए प्रकाशन से 60 दिन की अपेक्षा 30 दिन का समय घटाने पर भी आपत्ति की तथा प्रस्तावित मॉडल बिल्डिंग बाईलॉज 2026 को ब्रिटिश सरकार द्वारा कैंटोनमैट्स एक्ट 1924 अधीन बनाए बिल्डिंग बाईलॉज से भी कठोर कहा। उन्होंने अंग्रेजों के समय से भी सख्त बिल्डिंग बाईलॉज कैंटोनमैंट क्षेत्र में लागू करने के प्रस्ताव का विरोध किया।

शुक्ला ने बैठक में एकमात्र एजेंडे की आइटम बिल्डिंग बाइलाज में नई शर्तों को लागू करने का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि वर्तमान में जो बिल्डिंग बाईलॉज में नए-नए प्रावधान रख कर इसे लागू करने की जो कोशिश की जा रही है, उससे तो अंग्रेजों के समय के भी बिल्डिंग बाईलाज इतने सख्त नहीं थे, जिसके लिए श्री शुक्ला ने एक विरोध डाइसैंट नोट दिया व बोर्ड अध्यक्ष के समक्ष कैंटोनमेंट क्षेत्र की सिविल जनता को आ रही परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा कि छावनी में पुरानी इमारतों को मुरम्मत करने के समय आम लोगों को बहुत ही दिक्कतों व परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर कोई व्यक्ति चाहे प्लास्टर, रंग-रोगन, छोटे-मोटे बाथरूम के अलावा जर्जर इमारत की मुरम्मत भी करवाता है तो कैंटोनमैंट बोर्ड का बिल्डिंग विभाग बेवजह से लोगों को अनआथोराइज्ड कंस्ट्रक्शन व उसे सख्त नोटिस भेज कर मानसिक तौर पर यातनाएं दे रहा है।

शुक्ला ने कहा कि किसी को भी नोटिस देने से पहले जाँच की जाए कि वह क्या कार्य कर रहा है, पता नहीं कैंटोनमेंट बोर्ड के अधिकारी किस के दबाव में छावनी की आम जनता को बेवजह परेशान कर रहे हैं, लोगों को मुरम्मत की एक ईंट लगाने पर भी नोटिस थमा दिया जाता है। कैंटोनमेंट बोर्ड 1995 की रिपेयर व मेनटेनेंस की पॉलिसी को भी नजरअंदाज कर रहा है, साथ ही कंपाऊंडिंग के प्रावधान को भी नजरअंदाज कर कैंटोनमैंट एक्ट की उल्लंघना कर रहा है।

पुनीत भारती शुक्ला ने छावनी के 4-5 जगह रात को 10 से सुबह 6 बजे तक बंद होने वाले नाकों का भी मुद्दा उठाते हुए कहा कि लोगों को इस परेशानी से निजात मिलनी चाहिए, जिस पर बोर्ड अध्यक्ष कपिल सूद ने कहा कि लोगों की विभिन्न नाकों पर चैकिंग की परेशानी को दूर करने के लिए स्थानीय लोगों को स्टिकर उपलब्ध करवाए जाएंगे, जिससे कि वह बिना चैकिंग अंदर-बाहर आ जा सकेंगे।

बोर्ड अध्यक्ष कपिल सूद ने लोगों द्वारा डस्टबिनों के बाहर ही कूड़ा फैंकने वालों पर नकेल कसने के लिए सीईओ को निर्देश दिए, जिस पर सीईओ कुंवर ओमपाल सिंह ने सबंधित अधिकारियों को तुरंत एक्शन करने के लिए कहा। बैठक में ऑफिस सुपरिंटैंडैंट राजेश अटवाल, इंजीनियर तजिंदर सिंह, सेनेटरी सुपरिडेंट एस के यादव, लक्की शर्मा आदि उपस्थित थे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button