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महाशिवरात्रि महोत्सव पर श्री पुंडरीक गोस्वामी जी एवं श्रीमती रेणुका गोस्वामी जी ने किया शिव दिव्य अभिषेक – महेश गुप्ता

जालंधर, एच एस चावला। श्री राधा वृदेश जू मंदिर, भगत सिंह कालोनी, जालंधर में महाशिवरात्रि महोत्सव बड़े हर्षोल्लास व श्रद्धा भावना के साथ मनाया गया। महाशिवरात्रि महोत्सव ने इस पावन अवसर पर श्री पुंडरीक गोस्वामी जी एवं श्रीमती रेणुका गोस्वामी जी ने शिव दिव्य अभिषेक किया।

इस सबंधी मंदिर के प्रधान श्री महेश गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि ठाकुर श्री राधा वृंदेश जू के पावन प्रांगण में विराजमान श्री श्री भूतिश्वर महादेव जी का अति दिव्य अभिषेक हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बड़े हर्षोल्लास व श्रद्धा भाव के साथ सम्पन्न हुआ।

गौरतलब है कि इस वर्ष महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर पूज्य महाराज श्री एवं गुरु मैया जी की वैवाहिक वर्षगांठ महोत्सव का आयोजन जालंधर पीठ पर होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम से पूर्व श्री महेश गुप्ता ने समस्त तैयारियों का निरीक्षण किया।

बॉबी खन्ना ने पंडाल एवं प्रकाश- व्यवस्था की देखरेख की। सुधीर गुप्ता ने सभी अतिथियों का स्नेहपूर्वक स्वागत किया तथा स्मृति शर्मा ने उत्सव की रूपरेखा तैयार की।

मंदिर प्रांगण में सौरव गर्ष (फगवाड़ा) ने “मुझे दुनिया से नहीं कोई काम, मैं तो रटू श्री राधा राधा नाम” भजन प्रस्तुत कर एवं राधारमणा राधा नाम की धुन लगाकर सारा माहौल भक्तिमय कर दिया। पूज्यनीय गुरु मैया जी द्वारा संचालित निमाई पाठशाला के जालंधर एवं अमृतसर के बच्चों ने भी अपनी प्रस्तुति से उपस्थित भक्जनों का मन मोह लिया व सभी भक्ति भाव में झूम उठे।

महाभिषेक से पूर्व पूज्य महाराज श्री जी ने शिष्यवर्ग, भक्तों एवं स्थानीय क्षेत्र से आए श्रद्धालुओं को मंदिर में ठाकुर जी के शिखर (गुंबद) निर्माण की शुभ सूचना दी। इस पावन कार्य का शुभारंभ स्वयं महाराज श्री जी ने किया तथा उपस्थित भक्तों ने भी सेवा अर्पित की।

श्री महेश गुप्ता ने बताया कि प्रातः 6 बजे से सार्वजनिक अभिषेक आरंभ हो गया था। सायं 6 बजे चड्डा परिवार एवं रात्रि 7:30 बजे अन्य श्रद्धालुओं ने अभिषेक किया। तत्पश्चात पूज्य महाराज श्री जी ने रात्रि में विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ महाभिषेक सम्पन्न किया। अभिषेक के समय मंदिर की समस्त विद्युत व्यवस्था बंद कर दी गई तथा दीपों की दिव्य ज्योति में अभिषेक हुआ, जिससे वातावरण अत्यंत आध्यात्मिक एवं भावपूर्ण हो उठा। इसके उपरांत महाराज श्री जी ने उत्सव आरती की तथा उपस्थित संगत को भी आरती का अवसर प्राप्त हुआ। आरती उपरांत सभी श्रद्धालुओं ने श्रद्धा सहित प्रशाद ग्रहण किया।

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